मोटापा और ज्योतिष: कौन सा ग्रह बढ़ा देता है मोटापा! अभी जानें !

 

 

 

 

भारतीय वैदिक ज्योतिष में हर ग्रह केवल भाग्य, करियर और रिश्तों को ही प्रभावित नहीं करता बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य और शरीर पर भी गहरा असर डालते हैं। कई बार देखा गया है कि व्यक्ति लाख कोशिश करने के बावजूद वजन नियंत्रित नहीं कर पाता। इसके पीछे केवल खान-पान या जीवनशैली ही जिम्मेदार नहीं होती, बल्कि ग्रहों की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है। आज ओमांश एस्ट्रोलॉजी आपको ज्योतिष का और मोटापे का क्या है कनेक्शन इससे जुड़ी अहम जानकारी देने जा रहे हैं साथ ही आप मोटापा कैसे कम कर सकते हैं इसके उपाय भी आपको बताने जा रहे हैं!

 

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे

 

मोटापे से जुड़े ग्रह कौन-कौन से हैं?

 

कुंडली में उनकी स्थिति कैसी भूमिका निभाती है?

किस भाव और ग्रह का प्रभाव शरीर को भारी बनाता है?

और अंत में, मोटापा कम करने के लिए ज्योतिषीय उपाय क्या हैं।

 

 

**मोटापे से जुड़े प्रमुख ग्रह

*चंद्रमा – जल तत्व और शरीर की नमी

चंद्रमा हमारे शरीर के जल तत्व को नियंत्रित करता है।

यदि जन्मकुंडली में चंद्रमा अशुभ या अधिक बलवान होकर बिगड़ा हुआ हो तो व्यक्ति का शरीर पानी रोकने लगता है, जिससे वजन और सूजन बढ़ती है।

विशेषकर जब चंद्रमा 6वें, 8वें या 12वें भाव में हो तो मोटापे का खतरा अधिक रहता है।

 

*बृहस्पति (गुरु) – विस्तार और वृद्धि का कारक

गुरु ग्रह को “वृद्धिकारक” कहा गया है।

जब यह अशुभ भावों में हो या राहु-केतु से पीड़ित हो, तब यह व्यक्ति को मोटापा, फैट और ब्लड शुगर की समस्या दे सकता है। विशेषकर गुरु यदि 1st (लग्न), 4th, 6th या 11th भाव में भारी होकर बैठ जाए तो शरीर फूला हुआ दिखने लगता है।

 

*शुक्र – विलासिता और मीठा भोजन

शुक्र ग्रह सुख-सुविधा और स्वादिष्ट भोजन का कारक है।

जिनकी कुंडली में शुक्र बलवान हो और राहु के साथ हो, वे लोग मीठा, तैलीय और ठंडी चीजों की ओर आकर्षित होते हैं।

इसके परिणामस्वरूप वजन और मोटापा बढ़ने लगता है।

 

 *शनि – धीमी गति और मोटापा

शनि ग्रह आलस्य और धीमी गति का प्रतीक है।

जब शनि अशुभ होकर बैठता है तो व्यक्ति में मेटाबॉलिज़्म स्लो हो जाता है, जिससे वजन आसानी से घटता नहीं है।शनि के प्रभाव में व्यक्ति मेहनत से बचता है और शरीर पर चर्बी जमा होने लगती है।

 

 भाव और मोटापा – कुंडली का विश्लेषण

*प्रथम भाव (लग्न) – यदि यहां गुरु, चंद्रमा या शुक्र अशुभ स्थिति में हों तो शरीर भारी हो जाता है।

 

*चतुर्थ भाव (घर और सुख का भाव) – यहां ग्रहों की अशुभता व्यक्ति को भोजनप्रिय और आरामतलबी बनाती है।

 

*षष्ठ भाव (रोग भाव) – यदि यहां चंद्रमा या शुक्र बैठे हों तो मोटापा, मधुमेह और पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

 

*एकादश भाव (लाभ भाव) – यहां गुरु या शुक्र का प्रभाव खाने-पीने की ललक बढ़ाता है, जिससे शरीर पर चर्बी जमा होती है।

 

 

 मोटापे के ज्योतिषीय कारण

1. चंद्रमा और गुरु का मिलन (गजकेसरी योग) यदि अशुभ हो जाए तो शरीर अत्यधिक बढ़ सकता है।

 

2. राहु के साथ शुक्र होने पर व्यक्ति खाने-पीने पर नियंत्रण नहीं रख पाता।

3. शनि के प्रभाव से आलस्य बढ़ता है और व्यायाम की कमी से वजन बढ़ता है।

4. यदि लग्नेश कमजोर हो और गुरु/शुक्र बलवान हों तो भी मोटापा बढ़ता है।

 

**मोटापा कम करने के ज्योतिषीय उपाय;

*चंद्रमा के लिए उपाय

*सोमवार के दिन शिवजी को जल चढ़ाएं।

*दूध और चावल का दान करें।

*रोज़ सुबह चंद्र मंत्र का जाप करें – “ॐ चंद्राय नमः”।

 

**बृहस्पति के लिए उपाय

*गुरुवार को पीली वस्तुएं दान करें।

*केले के पेड़ की पूजा करें।

*ओम बृं बृहस्पतये नमः मंत्र का जाप करें।

 

*शुक्र के लिए उपाय

*शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा करें।

*सफेद वस्त्र और मिठाई दान करें।

*हीरा या ओपल पहनने से पहले किसी ज्योतिषी से परामर्श लें।

 

*शनि के लिए उपाय

*शनिवार को पीपल के पेड़ की पूजा करें।

*काले तिल, उड़द और तेल का दान करें।

*रोज़ शाम को शनि मंत्र का जाप करें – “ॐ शं शनैश्चराय नमः”।

 

**जीवनशैली में ज्योतिषीय संतुलन

*ग्रहों के उपायों के साथ जीवनशैली बदलना भी जरूरी है!

*नियमित योग और ध्यान करें।

*भोजन में ताजे फल, सब्जियां और हल्का आहार लें।

*तैलीय और जंक फूड से दूरी बनाएं।

 

रोज़ाना सूर्य नमस्कार करें – इससे ग्रहों की ऊर्जा भी संतुलित होती है और वजन भी घटता है।

 

मोटापा केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं बल्कि यह ग्रहों के प्रभाव से जुड़ा हुआ ज्योतिषीय कारण भी है। चंद्रमा, गुरु, शुक्र और शनि ऐसे प्रमुख ग्रह हैं जो शरीर को भारी बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।

 

यदि ये ग्रह कुंडली में अशुभ प्रभाव देते हैं तो साधारण डाइट और व्यायाम के बावजूद मोटापा आसानी से नियंत्रित नहीं होता। ऐसे में ज्योतिषीय उपाय, पूजा और मंत्रजाप के साथ सही जीवनशैली अपनाकर न केवल वजन कम किया जा सकता है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतु

लन भी प्राप्त होता है।

 

याद रखें – शरीर का स्वास्थ्य और ग्रहों का संतुलन साथ-साथ चलें तो जीवन हमेशा सुखमय और ऊर्जावान बना रहता है।

 

 

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