श्राद्ध 2025 : श्राद्ध 2025 में कब है? नोट करे पूजा की सही विधि, तिथि, और अनसुने उपाय!
हिंदू धर्म में श्राद्ध पक्ष जिसे पितृ पक्ष भी कहा जाता है, अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण समय माना गया है! यह कालखंड अपने पूर्वजों को स्मरण करने, उनकी आत्मा की शांति के लिए कर्मकांड करने और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने का विशेष अवसर प्रदान करता है! शास्त्रों में कहा गया है कि “मातृदेवो भव, पितृदेवो भव” – अर्थात माता-पिता और पूर्वज देवतुल्य होते हैं! जब हम अपने पितरों को स्मरण कर श्रद्धा से कर्मकांड करते हैं तो वे प्रसन्न होकर संतान पर आशीर्वाद बरसाते हैं!
श्राद्ध पक्ष 2025 का समय 7 सितंबर से 21 सितंबर तक रहेगा! यह काल पितरों को याद करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का अद्वितीय अवसर है! इस अवधि में श्रद्धा और विश्वास के साथ तर्पण, पिंडदान और दान करने से न केवल पितरों की आत्मा को संतोष मिलता है, बल्कि संतान का जीवन भी सुख-समृद्धि से भर जाता है!
👉 इसलिए हर व्यक्ति को चाहिए कि इस श्राद्ध पक्ष में अपने सामर्थ्य अनुसार पितरों का स्मरण करे, ब्राह्मण और गरीबों को भोजन कराए और अपने पूर्वजों से आशीर्वाद प्राप्त करे! यही सच्चा श्राद्ध और सच्ची श्रद्धांजलि है! आज ओमांश एस्ट्रोलॉजी श्राद्ध 2025 में कब है, पूजा की सही विधि, तिथि और उपायों से जुड़ी बेहद अहम जानकारी लेकर प्रस्तुत है! तो आइए जानते हैं:
#श्राद्ध 2025 की तिथियाँ;
#वर्ष 2025 में पितृ पक्ष का आरंभ 7 सितंबर (रविवार, पूर्णिमा श्राद्ध) से होगा और इसका समापन 21 सितंबर (रविवार, सर्वपितृ अमावस्या / महालय अमावस्या) को होगा! यह पूरा समय 16 दिनों का होता है जिसमें प्रत्येक तिथि को किसी न किसी विशेष श्राद्ध का महत्व होता है!
*दिनवार श्राद्ध 2025;
*7 सितंबर (रविवार) – पूर्णिमा श्राद्ध
*8 सितंबर (सोमवार) – प्रतिपदा श्राद्ध
*9 सितंबर (मंगलवार) – द्वितीया श्राद्ध
*10 सितंबर (बुधवार) – तृतीया एवं चतुर्थी श्राद्ध
*11 सितंबर (गुरुवार) – पंचमी श्राद्ध (भरणी पंचमी)
*12 सितंबर (शुक्रवार) – षष्ठी श्राद्ध
*13 सितंबर (शनिवार) – सप्तमी श्राद्ध
*14 सितंबर (रविवार) – अष्टमी श्राद्ध
*15 सितंबर (सोमवार) – नवमी श्राद्ध (अविधवा नवमी)
*16 सितंबर (मंगलवार) – दशमी श्राद्ध
*17 सितंबर (बुधवार) – एकादशी श्राद्ध
*18 सितंबर (गुरुवार) – द्वादशी श्राद्ध
*19 सितंबर (शुक्रवार) – त्रयोदशी श्राद्ध (माघ श्राद्ध)
*20 सितंबर (शनिवार) – चतुर्दशी श्राद्ध (घात चतुर्दशी)
*21 सितंबर (रविवार) – सर्वपितृ अमावस्या (महालया अमावस्या)
👉 यदि किसी को अपने पितरों की तिथि ज्ञात न हो, तो वह अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध कर सकता है!
#श्राद्ध 2025 का महत्व;
#पितृ पक्ष को “कर्म कांड का विशेष काल” कहा गया है!शास्त्रों के अनुसार, इस दौरान पितृ लोक से पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण, पिंडदान और अन्न-जल की अपेक्षा रखते हैं!
#श्राद्ध करने से पितृ दोष शांत होता है!
#परिवार में सुख-समृद्धि आती है!
#संतान की उन्नति और करियर में सफलता मिलती है!
#पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है!
**श्राद्ध में किए जाने वाले मुख्य कार्य;
1. पिंडदान – चावल, तिल और जौ मिलाकर पिंड बनाए जाते हैं और उन्हें जल में अर्पित किया जाता है!
2. तर्पण – तिल, कुश और जल से पूर्वजों का तर्पण किया जाता है!
3. ब्राह्मण भोजन – ब्राह्मण को आमंत्रित कर भोजन कराया जाता है और दक्षिणा दी जाती है!
4. दान-पुण्य – वस्त्र, अन्न, गौ-दक्षिणा या अन्य दान करना अत्यंत शुभ माना गया है!
5. कौवे, कुत्ते और गाय को भोजन – शास्त्रों में कहा गया है कि इनके माध्यम से पितरों तक अन्न-जल पहुँचता है!
**श्राद्ध के समय विशेष नियम;
#श्राद्ध करने वाले को सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए!
#श्राद्ध काल में मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज का त्याग करें!
#घर में कलह या नकारात्मक विचारों से बचें!
#श्राद्ध करने वाले को सफेद वस्त्र पहनना शुभ माना गया है!
इस समय घर में दीपक जलाना और गंगा जल का छिड़काव करना पवित्रता बनाए रखता है!
#ज्योतिषीय दृ;ष्टि से श्राद्ध का महत्व;
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि कुंडली में पितृ दोष हो तो व्यक्ति को जीवन में अनेक प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ता है! पितृ दोष सामान्यतः सूर्य, चंद्रमा, राहु या शनि से संबंधित होता है! पितृ पक्ष में किए गए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य से यह दोष शांत होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है!
इस वर्ष 2025 में विशेष योग यह है कि बृहस्पति ग्रह पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर करेंगे! इसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ संयोग माना जा रहा है! इस काल में पितृ तर्पण और दान करने से कर्म बंधन हल्के होते हैं और आध्यात्मिक उन्नति होती है!
*श्राद्ध 2025 के लिए विशेष उपाय;
1. पितृ तर्पण का जप मंत्र;
प्रतिदिन तर्पण करते समय “ॐ पितृभ्यः स्वधा” मंत्र का जप करना चाहिए!
2. कौवे को भोजन कराना;
पितरों की तृप्ति के लिए कौवे को अन्न अवश्य डालें!
3. पीपल वृक्ष की पूजा;
पितृ दोष शांति के लिए पितृ पक्ष में पीपल वृक्ष की पूजा और जल अर्पण करना शुभ होता है!
4. गाय को रोटी और हरा चारा खिलाना
यह न केवल पितरों को तृप्त करता है बल्कि घर में समृद्धि भी लाता है!
5. गरीब और जरूरतमंदों को भोजन कराना;
श्राद्ध के समय किसी गरीब, अनाथ या जरूरतमंद को भोजन कराना सर्वश्रेष्ठ दान माना जाता है!
6. पितृ दोष निवारण हवन;
कुंडली में यदि गंभीर पितृ दोष है तो पंडित से परामर्श कर विशेष हवन करवाना चाहिए!
*श्राद्ध से मिलने वाले लाभ;
*पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति!
*परिवार से जुड़ी अड़चनें, बाधाएं और रोग कम होना!
*संतान सुख और विवाह में आ रही रुकावट दूर होना!
*व्यापार और नौकरी में प्रगति के अवसर मिलना!
*घर-परिवार में सुख-शांति और आपसी प्रेम बढ़ना!