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गणेश चतुर्थी 2024: स्थापना विधि, तिथि और उपाय , भूलकर भी न करे ये गलती:

गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है जिसे पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की स्थापना कर उनकी पूजा की जाती है। यह पर्व विशेष रूप से महाराष्ट्र में धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन देश के अन्य हिस्सों में भी इसका बहुत महत्व है। गणेश जी को विघ्नहर्ता और बुद्धि, समृद्धि, और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है।  आज ओमांश एस्ट्रोलॉजी अपने पाठको के लिए इस लेख में गणेश चतुर्थी स्थापना विधि, तिथि, और पूजा के ज्योतिषीय उपायों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

गणेश चतुर्थी की तिथि:

गणेश चतुर्थी हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। इस वर्ष, 7 सितंबर के दिन यह पर्व   पड़ रहा है।

भूलकर भी ना करें ये गलती, सावधानी:

इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से बचना चाहिए| गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा देखने की मनाही का संबंध पुराणिक कथा से है | ऐसा कहा जाता है इस दिन भगवान गणेश ने चंद्रमा को उसके अहंकार के कारण श्राप दिया था | श्राप के अनुसार जो भी व्यक्ति गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन करेगा उस पर झूठे आरोप लगेंगे और साथ ही बदनामी का सामना करना पड़ेगा| यदि किसी से भूलवश चन्द्रमा के दर्शन हो भी जाएं तो स्यमंतक मणी की कथा सुननी चाहिए|

गणेश स्थापना विधि:

(1) प्रतिमा का चयन: गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना का विशेष महत्व है। प्रतिमा मिट्टी, धातु, या किसी अन्य शुद्ध पदार्थ से बनी होनी चाहिए। प्रतिमा का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, जो कि शुभ मानी जाती है।

(2) स्थान का चयन: गणेश जी की स्थापना के लिए घर में स्वच्छ और पवित्र स्थान का चयन करें। पूजा के स्थान को पहले साफ कर लें और वहां गंगाजल का छिड़काव करें।

(3) मंत्र उच्चारण: गणेश जी की स्थापना से पहले पूजा स्थल पर ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का उच्चारण करते हुए दीप प्रज्ज्वलित करें।

(4) स्थापना की प्रक्रिया:

– एक चौकी या पटरे पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।

– इस कपड़े पर थोड़ा अक्षत (चावल) रखें।

– अब गणेश प्रतिमा को अक्षत पर स्थापित करें।

– गणेश जी की मूर्ति के पास एक सुपारी रखें, जो कि गणेश जी का प्रतीक मानी जाती है।

(5) स्नान और वस्त्र:

गणेश जी की प्रतिमा को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से स्नान कराएं।

– स्नान के बाद प्रतिमा को शुद्ध जल से धोकर सूखे कपड़े से पोंछ लें।

– अब गणेश जी को नए वस्त्र अर्पित करें।

(6) पूजा सामग्री: गणेश पूजा के लिए रोली, मौली, अक्षत, दूर्वा (घास), लाल फूल, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य (लड्डू या मोदक) और फल अर्पित करें। गणेश जी को विशेष रूप से दूर्वा और मोदक बहुत प्रिय होते हैं।

(7) आरती: पूजा के अंत में गणेश जी की आरती करें और ‘गणपति बप्पा मोरया’ का जयकारा लगाएं। आरती के बाद प्रसाद को सभी में वितरित करें।

(8) विसर्जन: गणेश चतुर्थी के दसवें दिन, गणेश प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। विसर्जन के लिए प्रतिमा को किसी जलाशय में विसर्जित करते समय भगवान गणेश से अगले वर्ष पुनः आने का निवेदन करें।

ज्योतिषीय उपाय:

(1) विघ्नों का नाश: यदि आपकी कुंडली में राहु, केतु, या शनि से संबंधित दोष हैं, तो गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा विशेष रूप से करें। इसके लिए ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।

(2) बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति: गणेश जी बुद्धि और विवेक के देवता हैं। गणेश चतुर्थी के दिन विद्यार्थियों को भगवान गणेश की पूजा अवश्य करनी चाहिए। ‘ॐ वक्रतुण्डाय हुम्’ मंत्र का जाप करने से बुद्धि का विकास होता है।

(3) आर्थिक समृद्धि: धन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करें और ‘ॐ श्री गणेशाय नमः’ मंत्र का जाप करें। इससे आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है।

(4) शत्रुओं से रक्षा: यदि कोई व्यक्ति शत्रुओं से परेशान है, तो गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी के सामने दीप जलाकर ‘ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्’ मंत्र का जाप करें। इससे शत्रु पर विजय प्राप्त होगी।

(5) स्वास्थ्य समस्याओं का निवारण: गणेश चतुर्थी के दिन ‘ॐ वक्रतुण्डाय नमः’ मंत्र का जाप करें और गणेश जी को गुड़ व चने का भोग लगाएं। इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में लाभ मिलता है।

 

उपसंहार:

गणेश चतुर्थी का पर्व न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी इसका विशेष महत्व है। गणेश जी की पूजा से जीवन के समस्त विघ्नों का नाश होता है और सुख, समृद्धि, और शांति की प्राप्ति होती है। गणेश चतुर्थी के दिन उपरोक्त विधि और उपायों को अपनाकर आप भगवान गणेश की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में आने वाले सभी विघ्नों को धैर्य, बुद्धि, और संयम के साथ पार किया जा सकता है। गणपति बप्पा मोरया!

 

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