श्री यंत्र में करती है मां लक्ष्मी वास: यंत्र सक्रिय करते हुए कौन-सी गलतियों से बचें? जानिए संपूर्ण जानकारी

 

 

श्री यंत्र स्थापना:

हिंदू धर्म और वैदिक परंपरा में श्री यंत्र को अत्यंत शुभ, शक्तिशाली और चमत्कारी माना गया है। यह केवल एक ज्यामितीय आकृति नहीं, बल्कि मां लक्ष्मी औआदिशक्ति त्रिपुरा सुंदरी का दिव्य स्वरूप है। मान्यता है कि जहां श्री यंत्र की सही विधि से स्थापना और पूजा होती है, वहां धन, वैभव, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। लेकिन जितना शक्तिशाली यह यंत्र है, उतनी ही सावधानी इसकी पूजा और रख-रखाव में आवश्यक है। थोड़ी-सी भूल भी लाभ के स्थान पर हानि, धन रुकावट और मानसिक अशांति का कारण बन सकती है।

 

ओमांश एस्ट्रोलॉजी के इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि श्री यंत्र से जुड़ी कौन-कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए, ताकि मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहे। और साथ ही जानेंगे श्री यंत्र स्थापित करने की संपूर्ण विधि के बारे में!

 

 

*श्री यंत्र का आध्यात्मिक महत्व

श्री यंत्र को “यंत्रों का राजा” कहा गया है। इसमें बने नौ त्रिकोण पूरे ब्रह्मांड का प्रतीक हैं—

चार ऊपर की ओर = शिव तत्व

पांच नीचे की ओर = शक्ति तत्व

 

 

इनके संतुलन से ही धन, ज्ञान, शक्ति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसलिए श्री यंत्र केवल धन का ही नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का भी माध्यम है।

 

श्री यंत्र से जुड़ी प्रमुख गलतियां (जिनसे अवश्य बचें)

1️⃣ गलत स्थान पर श्री यंत्र की स्थापना

 

सबसे बड़ी गलती है श्री यंत्र को अनुचित स्थान पर रखना

 

❌ जिन जगहों पर न रखें:

बाथरूम या शौचालय के पास

जूते-चप्पल रखने की जगह

रसोई में गैस या सिंक के पास

बेडरूम में पैरों की दिशा में

 

 

✔️ सही स्थान:

घर का ईशान कोण (उत्तर-पूर्व)

साफ-सुथरा पूजा स्थल

लकड़ी या तांबे की चौकी पर

गलत स्थान पर रखा श्री यंत्र निष्क्रिय हो जाता है।

 

 

2️⃣ बिना प्राण-प्रतिष्ठा के पूजा करना

बहुत से लोग बाज़ार से श्री यंत्र लाकर सीधे पूजा शुरू कर देते हैं।

👉 यह एक बड़ी भूल है।

जब तक श्री यंत्र में प्राण-प्रतिष्ठा न हो, वह केवल धातु या चित्र मात्र रहता है।

 

 

3️⃣ गंदे हाथों या अशुद्ध अवस्था में स्पर्श

श्री यंत्र अत्यंत सात्त्विक वस्तु है

❌ गलतियां:

बिना स्नान पूजा

नकारात्मक मनःस्थिति में स्पर्श

झूठ, क्रोध या लोभ की स्थिति में पूजा

 

✔️ ध्यान रखें:

स्नान के बाद ही पूजा

शांत और श्रद्धा भाव

साफ वस्त्र

 

 

4️⃣ श्री यंत्र को छिपाकर या अलमारी में बंद रखना

कई लोग सोचते हैं कि श्री यंत्र को छिपाकर रखने से धन सुरक्षित रहेगा।

👉 यह सोच गलत है।

श्री यंत्र को ऊर्जा प्रवाह के लिए खुला स्थान चाहिए।

 

✔️ हमेशा:

खुले और प्रकाशयुक्त स्थान पर रखें

दीपक की रोशनी उस पर पड़े

 

 

5️⃣ नियमित पूजा न करना

श्री यंत्र एक सक्रिय साधना यंत्र है।

❌ अगर:

लंबे समय तक पूजा न करें

धूल जमी रहे

दीपक-धूप बंद कर दें

 

👉 तो उसका प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है।

 

✔️ क्या करें:

रोज़ दीपक (घी या तिल तेल)

शुक्रवार को विशेष पूजा

“ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र जप

 

6️⃣ गलत दिशा में श्री यंत्र रखना

दिशा का विशेष महत्व है।

 

❌ दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना

❌ उल्टा या टेढ़ा रखा हुआ यंत्र

 

✔️ सही दिशा:

यंत्र का मुख पूर्व या उत्तर की ओर स्वयं पूजा करते समय पूर्व की ओर मुख करके बैठे!

 

 

7️⃣ लालच या केवल धन-लोभ से पूजा करना

 

मां लक्ष्मी चंचल हैं, लेकिन वह केवल धन-लालच से प्रसन्न नहीं होतीं।

 

👉 यदि श्री यंत्र की पूजा केवल:

दूसरों से आगे निकलने

गलत तरीकों से धन पाने

छल-कपट के लिए की जाए

तो मां लक्ष्मी विरक्ति दिखा देती हैं।

 

✔️ पूजा में रखें:

कृतज्ञता

दान भावना

धर्म और कर्म का संतुलन

 

8️⃣ टूटे या क्षतिग्रस्त श्री यंत्र का प्रयोग

 

अगर श्री यंत्र:

टूट जाए

उस पर दरार आ जाए

रेखाएं घिस जाएं

 

👉 तो उसकी पूजा तुरंत बंद कर देनी चाहिए

 

✔️ क्या करें:

उसे साफ कपड़े में लपेटें

बहते जल में प्रवाहित करें

नया श्री यंत्र विधिवत स्थापित करें

 

9️⃣ सभी को बार-बार दिखाना या छूने देना

 

श्री यंत्र व्यक्तिगत साधना का विषय है।

 

❌ बार-बार दूसरों को दिखाना

❌ हर किसी को छूने देना

इससे उसकी ऊर्जा प्रभावित होती है।

 

 

🔟 अधूरी जानकारी के साथ तांत्रिक प्रयोग

अधूरी जानकारी से पूजा करने पर या फिर सही बीज मंत्र प्रयोग में ना लाना!

विशेष तांत्रिक विधि

रात में प्रयोग करना इत्यादि

👉 यह अत्यंत हानिकारक हो सकता है।

 

✔️ केवल सरल, सात्त्विक पूजा करें।

श्री यंत्र से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियम:

शुक्रवार और पूर्णिमा विशेष शुभ

लाल या पीले फूल अर्पित करें

धूप में सुगंधित अगरबत्ती

नियमित दान (चावल, दूध, सफेद वस्त्र)

 

श्री यंत्र वास्तव में मां लक्ष्मी का साक्षात निवास है, लेकिन उसकी कृपा अनुशासन, श्रद्धा और शुद्धता से ही प्राप्त होती है। यदि सही विधि अपनाई जाए और ऊपर बताई गई गलतियों से बचा जाए, तो श्री यंत्र जीवन में धन, शांति, सौभाग्य और स्थिरता अवश्य प्रदान करता है।

आगे जानते हैं श्री यंत्र स्थापना विधि;

श्री यंत्र की सही स्थापना विधि : घर में मां लक्ष्मी का स्थायी वास कैसे कराएं?

 

श्री यंत्र को सही विधि से स्थापित करना उतना ही ज़रूरी है जितना उसकी पूजा करना। गलत स्थापना से यंत्र निष्क्रिय हो सकता है, जबकि सही स्थापना जीवन में धन, स्थिरता, शांति और सौभाग्य को आकर्षित करती है। नीचे दी गई विधि सरल, सात्त्विक और सुरक्षित है—घर पर स्वयं करने योग्य।

 

🌸 श्री यंत्र स्थापना से पहले तैयारी

 

1️⃣ शुभ दिन और समय

शुक्रवार, पूर्णिमा, दीपावली, अक्षय तृतीया सर्वोत्तम

समय: सुबह सूर्योदय के बाद या प्रदोष काल

राहुकाल से बचें

 

2️⃣ आवश्यक सामग्री

तांबे/पंचधातु/क्रिस्टल का श्री यंत्र

लकड़ी/तांबे की चौकी

गंगाजल, कच्चा दूध, शहद, दही (शुद्धिकरण हेतु)

लाल/पीले फूल, अक्षत (चावल)

दीपक (घी/तिल तेल), धूप

लाल कपड़ा

कलश में जल

 

🔱 श्री यंत्र स्थापना विधि;

🪔 स्थान का चयन

घर का ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) सर्वोत्तम

पूजा कक्ष या शांत, स्वच्छ स्थान

यंत्र का मुख पूर्व या उत्तर की ओर

 

🪔 शुद्धिकरण

 

श्री यंत्र को पहले जल → दूध → शहद → दही → पुनः जल से शुद्ध करें

फिर गंगाजल छिड़कें

स्वच्छ कपड़े से पोंछें

👉 यह चरण यंत्र की नकारात्मक ऊर्जा हटाता है।

 

🪔 आसन पर स्थापना

चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं

उसके ऊपर श्री यंत्र रखें

नीचे चावल के कुछ दाने रखें (स्थिरता का प्रतीक)

 

🪔प्राण-प्रतिष्ठा (सरल विधि)

दीप प्रज्वलित करें

शांत मन से 11 या 21 बार मंत्र जप करें:

“ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”

अंत में पुष्प अर्पित करें

 

👉 इससे यंत्र सक्रिय होता है

 

दोनों हाथ जोड़कर कहें:

“मैं श्रद्धा और धर्मपूर्वक श्री यंत्र की स्थापना कर रहा/रही हूँ। मां लक्ष्मी की कृपा से मेरे घर में शांति, समृद्धि और स्थिर धन का वास हो।”

 

🌼 स्थापना के बाद दैनिक पूजा कैसे करें?

✔️ रोज़ाना (5 मिनट)

दीपक जलाएं

11 बार मंत्र जप

मन में कृतज्ञता रखें

 

✔️ शुक्रवार विशेष दिन

सफेद/पीले फूल

खीर/मिठाई का भोग

घर में साफ-सफाई

 

🌕 श्री यंत्र पूजा के लाभ (क्या परिवर्तन दिखते हैं?)

धन आगमन में स्थिरता

खर्च पर नियंत्रण

घर में सकारात्मक वातावरण

निर्णय क्षमता में सुधार

मानसिक शांति

 

🧿 विशेष प्रश्न–उत्तर (FAQs)

 

Q1. क्या बेडरूम में रख सकते हैं?

👉 हाँ, लेकिन पैरों की दिशा में नहीं और स्थान साफ हो।

 

Q2. कितने दिन में असर दिखता है?

👉 सामान्यतः 21–45 दिन में सकारात्मक संकेत।

 

Q3. टूटा/दरार वाला यंत्र?

👉 पूजा न करें; विधिपूर्वक प्रवाहित करें।

 

श्री यंत्र की सही स्थापना अनुशासन, श्रद्धा और नियमितता से ही फल देती है। याद रखें—

मां लक्ष्मी वहीं ठहरती हैं जहां शुद्धता, कृतज्ञता और संतुलन होता है।

 

👉 याद रखें:

जहां श्रद्धा है, वहीं सिद्धि है। जहां अहंकार और लालच है, वहां लक्ष्मी नहीं ठहरती।

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