Kartik maas 2025: कार्तिक मास 2025 की सही तिथि, कार्तिक पूर्णिमा की तिथि, और विशेष उपाय!

 

 

 

 

 

 

 

 

#कार्तिक मास 2025: तिथि, महत्व, कार्तिक पूर्णिमा, और ज्योतिषीय उपाय*

 

 

हिंदू पंचांग में कार्तिक मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यकारी महीना माना गया है।!यह मास धर्म, भक्ति, तप, स्नान और दान का प्रतीक है! इस मास में भगवान विष्णु, भगवान शिव, और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है! विशेषकर कार्तिक पूर्णिमा का दिन अत्यंत पुण्यदायक माना गया है, जो मोक्ष प्राप्ति का द्वार खोलता है! आज ओमांश एस्ट्रोलॉजी अपने इस लेख में कार्तिक मास 2025 में कब से आरम्भ हो रहा है और साथ ही जानेंगे शुभ उपायों के बारे में,आइए जानें कार्तिक मास 2025 की सही तिथि, कार्तिक पूर्णिमा की तिथि, और इस मास में किए जाने वाले धार्मिक उपाय!

 

 

#कार्तिक मास 2025 की तिथि *

 

#कार्तिक मास 2025 हिंदी पंचांग के अनुसार #चंद्र मास* पर आधारित होता है!

कार्तिक मास प्रारंभ;

8 अक्टूबर 2025, बुधवार (पूर्णिमा के अगले दिन से)

 

**कार्तिक मास समाप्त:

5 नवंबर 2025, बुधवार (कार्तिक पूर्णिमा के दिन)

 

इस प्रकार कार्तिक मास 8 अक्टूबर से 5 नवंबर 2025 तक रहेगा!

 

 

#कार्तिक पूर्णिमा 2025 की तिथि (Kartik Purnima 2025 Date)*

 

 

#कार्तिक पूर्णिमा तिथि आरंभ:

5 नवंबर 2025, 10.36 रात बजे!

 

**पूर्णिमा तिथि समाप्त:

6 नवंबर 2025, शाम 06.50 बजे!

 

✅ इस दिन #गंगा स्नान*, #दीपदान*, #व्रत*, #तुलसी पूजन*, #शिव पूजन*, और #विष्णु पूजन* करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है!

 

 

#कार्तिक मास का धार्मिक महत्व*

 

#विष्णु भक्ति का मास:*

यह मास भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होता है। विशेष रूप से **शालिग्राम** पूजन, तुलसी विवाह और एकादशी व्रत का बड़ा महत्व है।

 

 

 

 

 

 

#शिव पूजन की महिमा:*

कार्तिक मास में भगवान शिव की उपासना से समस्त पापों का नाश होता है! प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पण करने से कष्ट दूर होते हैं!

 

#दीपदान की परंपरा:*

इस मास में प्रतिदिन तुलसी के समक्ष दीप जलाने की परंपरा है। यह दीप #पितरों की शांति**, #धन लाभ**, और #ग्रह दोष निवारण* के लिए अत्यंत उपयोगी होता है!

 

#गंगा स्नान व तीर्थ स्नान:*

कार्तिक मास में हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी, और पुष्कर जैसे तीर्थस्थलों पर स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जन्म-जन्म के पाप समाप्त होते हैं!

 

 

#कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व;

 

कार्तिक पूर्णिमा को कई धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोणों से शुभ माना जाता है!

 

**त्रिपुरासुर वध का दिन:* इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था, इसीलिए इसे ‘#त्रिपुरी पूर्णिमा* भी कहा जाता है!

 

#गुरु नानक देव जी का जन्म:

इस दिन सिख धर्म के संस्थापक **गुरु नानक देव जी** का जन्म हुआ था!

 

 #तुलसी विवाह समापन;

तुलसी विवाह कार्तिक शुक्ल एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक मनाया जाता है!

 

 

 

 

 

 

#कार्तिक मास में किए जाने वाले ज्योतिषीय उपाय ;

 

कार्तिक मास के दौरान कुछ विशेष उपाय करके आप जीवन की परेशानियों को कम कर सकते हैं और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं:

 

#धन वृद्धि के लिए उपाय*

 

**तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाएं!

 

* प्रतिदिन **“ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”** का 108 बार जप करें!

 

* शुक्रवार को चांदी का सिक्का लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें!

 

 

#कर्ज से मुक्ति पाने के लिए*

 

* हर सोमवार को शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल चढ़ाएं!

 

* “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें!

 

* एक नारियल को बहते जल में प्रवाहित करें!

 

#दांपत्य सुख एवं संतान प्राप्ति के लिए*

 

#तुलसी विवाह में भाग लें!

हर दिन पति-पत्नी मिलकर संध्या के समय तुलसी पूजन करें!

 

* कार्तिक मास में गौ सेवा करें!

 

#बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव**

 

#घर के मुख्य द्वार पर गोबर से बनाए दीपक में सरसों का तेल डालकर दीप जलाएं!

 

#दीपावली से कार्तिक पूर्णिमा तक लगातार दीप जलाना विशेष फलदायी होता है!

 

#पितृ दोष निवारण हेतु*

 

* कार्तिक मास में पवित्र नदी में पिंडदान करें!

* “ॐ पितृदेवाय नमः” मंत्र का जाप करें!

*पीपल पर मीठा जल अर्पित करें!

 

 

#कार्तिक मास में क्या करें और क्या न करें 

 

**क्या करें:**

 

* प्रतिदिन सूर्योदय से पहले स्नान करें (विशेषकर ब्रह्ममुहूर्त में)!

* तुलसी पूजन व दीपदान करें!

* सात्विक भोजन करें और व्रत रखें!

* गरीबों को भोजन, वस्त्र और दान दें!

 

❌ **क्या न करें:**

 

* मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन न करें!

* बुरे विचार, क्रोध और झूठ से बचें!

* बाल कटवाना या दाढ़ी बनवाना वर्जित माना गया है!

 

#पौराणिक मान्यताएं और कथाएं (Mythological Stories)*

 

 

 

 

 

#ध्रुव व प्रह्लाद की कथा:* इन भक्तों ने कार्तिक मास में कठोर तप कर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया था!

 

#राधा-कृष्ण की रासलीला: कार्तिक मास को रासलीला का मास भी कहा जाता है, जिसमें भगवान कृष्ण ने गोपियों के साथ रास रचाया था!

 

 

 

कार्तिक मास आत्मशुद्धि, पुण्य अर्जन और ईश्वर भक्ति का सबसे श्रेष्ठ समय होता है! इस मास में की गई तपस्या, दान, स्नान, और व्रत अनेक जन्मों के पापों को नष्ट कर देते हैं और मनुष्य को मोक्ष की ओर ले जाते हैं! विशेषकर कार्तिक पूर्णिमा का दिन भगवान विष्णु, शिव, और लक्ष्मी माता की कृपा पाने का सुअवसर है!

 

यदि आप ज्योतिषीय दृष्टिकोण से जीवन की समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो कार्तिक मास आपके लिए एक नया अध्याय खोल सकता है। नियमित रूप से इन उपायों को अपनाकर आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं!

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